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Friday, February 1, 2019

Budget 2019: बजट में बंपर टैक्स छूट, लेकिन 5 लाख से ज्यादा कमाने वालों को नहीं होगा फायदा

मोदी सरकार ने आयकर छूट की सीमा ढाई लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दिया है. लोकसभा चुनाव से पहले सवर्ण आरक्षण के बाद यह मोदी सरकार का दूसरा सबसे बड़ा दांव है. हालांकि 5 लाख से ज्यादा आय वाले लोगों को इसमें कोई राहत नहीं मिली है.



मोदी सरकार ने अंतरिम बजट 2019 में आयकर छूट (income tax) की सीमा ढाई लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दी है. लोकसभा चुनाव से पहले सवर्ण आरक्षण के बाद यह मोदी सरकार का दूसरा सबसे बड़ा दांव है. हालांकि, 5 लाख से ज्यादा आय वाले लोगों को इससे फायदा नहीं होगा क्योंकि सरकार ने टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया है. पांच लाख से ज्यादा आय वाले लोगों को टैक्स राहत पर पीयूष गोयल ने कहा कि पूर्ण बजट में इसपर फैसला हो सकेगा.
दरअसल नए ऐलान के अनुसार नौकरी-पेशा लोगों के लिए राहत का ऐलान हुआ. इसमें 5 लाख रुपये तक की कमाई वाले लोग टैक्स फ्री होंगे. टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं हुआ है यानी कि 5 लाख से ज्यादा कमाई वाले लोगों के लिए अब भी राहत ढाई लाख तक की ही हैं. लेकिन जिनकी आय 5 लाख से नीचे है उनके लिए राहत 5 लाख तक है. वर्तमान स्लैब के अनुसार ढाई से 5 तक लाख रुपये तक की कमाई पर 5 फीसदी आयकर देना पड़ता था. ये नियम 5 लाख से ज्यादा कमाई वालों के लिए जारी रहेगा. यानी जिनकी आमदनी 5 लाख रुपये से ज्यादा है, उन्हें पुराने टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स देना ही पड़ेगा.
कितना बचेगा?
नए ऐलान से पहले 5 लाख रुपये तक की आदमनी पर 5 फीसदी आयकर देना पड़ता था. अगर किसी की कमाई ढाई लाख रुपये से ज्यादा थी, तो उसे साढ़े 12 हजार रुपये तक टैक्स चुकाना पड़ता था. यानी अब कम से कम ढाई लाख से 5 लाख रुपये तक आमदनी वालों को सालाना कम से कम साढ़े 12 हजार रुपये की बचत होने वाली है. नीचे चार्ट में गणित समझें. (Chart Credit: Deloitte)
(Credit: Deloitte)
पीयूष गोयल ने कहा कि इस टैक्स छूट का लाभ 3 करोड़ मध्यवर्गीय करदाताओं को मिलेगा. नए स्लैब के मुताबिक 5 लाख रुपये तक की कमाई वालों को कोई टैक्स नहीं देना पड़ेगा. जबकि 5 लाख से 10 लाख रुपये तक की कमाई पर 20 फीसदी आयकर लगेगा. जबकि 10 लाख से अधिक आमदनी वालों से 30 फीसदी कर वसूला जाएगा. यानी सरकार ने केवल 5 फीसदी वाले टैक्स स्लैब को खत्म कर दिया है.
सीनियर सिटीजन को मिली छूट यहां देखें. (Chart Credit: Deloitte)
ये भी तोहफा....
इसके अलावा पिछले बजट में लाए गए स्टैंटर्ड डिडक्शन की सीमा भी मोदी सरकार ने 40 हजार रुपये से बढ़ाकर 50 हजार रुपये कर दिया है. यही नहीं, 40000 रुपये तक की ब्याज आय पर अब कोई टीडीएस नहीं देना होगा. पीयूष गोयल ने अपने बजट भाषण में बताया कि अगर 6.5 लाख रुपये तक की कमाई करने वाले प्रॉविडेंट फंड और अन्य इक्विटीज में निवेश करते हैं तो कोई टैक्स नहीं देना होगा. 
सरकार की उपलब्धि
इसके अलाव पीयूष गोयल ने बजट भाषण में कहा, 'टैक्स भरने वालों की संख्या 80 फीसदी तक बढ़ी है. जिससे टैक्स कलेक्शन बढ़कर 12 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया. हमने टैक्स फाइलिंग की प्रक्रिया को आसान बनाया है, 24 घंटे में आयकर रिटर्न प्रोसेसिंग की सुविधा दी जा रही है, जिसमें पहले महीनों लग जाते थे. टैक्स मूल्यांकन के लिए अब दफ्तर नहीं जाना पड़ेगा.'  
छूट से पहले का स्लैब
गौरतलब है कि इससे पहले इनकम टैक्स में आयकर छूट का दायरा ढाई लाख रुपये तक था, जिसे अब बढ़ा दिया गया है. इस ऐलान से पहले टैक्स स्लैब में 2.5 लाख रुपये तक सालाना कमाई पर कोई टैक्स नहीं देना पड़ता था. जबकि 2.5 से 5 लाख रुपये की आय पर 5 फीसद की दर से टैक्स लगता था. वहीं 5-10 लाख रुपये की सालाना आय पर 20 फीसदी और 10 लाख रुपये से अधिक की सालाना आय पर 30 फीसदी टैक्स लगता था और अब भी वसूला जाएगा.
पीयूष गोयल ने बताया कि नोटबंदी के बाद 1 करोड़ लोगों ने पहली बार टैक्स फाइल किया. नोटबंदी के 1 लाख 36 हजार करोड़ रुपये का टैक्स मिला है. आखिरी में पीयूष गोयल ने कहा कि यह सिर्फ अंतरिम बजट नहीं, देश के विकास यात्रा का माध्यम है, ये जो देश बदल रहा है इसका श्रेय देशवासियों को जाता है.

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